कानपुर न्यूज डेस्क: लखनऊ में पुलिस ने फर्जी फर्मों के जरिए 250 करोड़ रुपये की जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हड़पने वाले बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में अमरदीप और कपिल नामक दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है, जो महज 12वीं पास बताए जा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने 38 बोगस फर्में पंजीकृत कराकर कागजों में करोड़ों का लेनदेन दिखाया।
गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। ये लोग जरूरतमंद युवकों को बैंक से लोन दिलाने का झांसा देते थे और उनके आधार व पैन कार्ड जैसे दस्तावेज अपने पास रख लेते थे। इसके बाद उन्हीं दस्तावेजों से फर्जी फर्में बनाकर बैंक खाते खुलवाए जाते थे, लेकिन मोबाइल नंबर और संपर्क विवरण आरोपितों के रहते थे। इन्हीं फर्मों के जरिए फर्जी खरीद-बिक्री दिखाकर भारी भरकम आईटीसी क्लेम की जाती थी।
मामले का खुलासा तब हुआ जब नजीराबाद निवासी अनुराग वर्मा लोन की जानकारी लेने बैंक पहुंचा। वहां उसे पता चला कि उसके नाम से ‘रुद्र इंटरप्राइजेज’ नामक फर्म पंजीकृत है और येस बैंक में खाता खुला है, जिसमें लाखों रुपये का लेनदेन हो चुका है। जांच आगे बढ़ी तो ‘पार्वती इंटरप्राइजेज’ और ‘शिवांश इंटरप्राइजेज’ जैसी फर्मों का नेटवर्क सामने आया। पुलिस को संदेह है कि शिवांश इंटरप्राइजेज इस पूरे फर्जीवाड़े की मुख्य कड़ी है।
छानबीन के दौरान तीन फर्मों के खातों में जमा 1.50 करोड़ रुपये फ्रीज किए गए हैं। आरोपितों के पास से 30 मोबाइल फोन, कई फर्जी सिम कार्ड, चेकबुक, फर्मों के दस्तावेज, साइन बोर्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है। पुलिस अब जीएसटी विभाग के साथ मिलकर लेनदेन की गहन जांच कर रही है और अन्य संभावित आरोपितों की तलाश जारी है।